amma जरा देख टू ऊपर चले आया रहें हैं बादल
गरज रहे है ,बरस रहे हैं दीख रहा है जल ही जल>
याद आया ये कविता कहाँ पड़ी थी बी थे वे ये बच्चा अम्मा को बदल क्यो दिखा रहा है, ख़ुद ही देखता और आनंदित होता टू क्या हर्ज़ था। आदमी का बच्चा है रोअमंच, पुलक खुसी भावनाओ को शेयर किए बिना रह ही नही सकता, इसीलिए टू ब्लॉग बनते हैं
Monday, May 26, 2008
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